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Yogini Ekadashi 2022 Rules : योगिनी एकादशी के नियम : योगिनी एकादशी क्या करें क्या ना करें

Yogini ekadashi 2022 Rules in Hindi:  योगिनी एकादशी के नियम: एकादशी के दिन क्या करें क्या ना करें

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Yogini ekadashi 2022 Rules in Hindi:  योगिनी एकादशी के नियम: एकादशी के दिन क्या करें क्या ना करें

हिंदू सनातन धर्म ग्रंथों में हर एकादशी का अपना अलग महत्व बताया गया है। एकादशीओं की अलग-अलग विशेषताओं के कारण इनके नाम भी भिन्न-भिन्न रखे गये हैं। प्रत्येक वर्ष में चौबीस एकादशियां होती हैं, मल मास यानी के अधिक मास की एकादशियों को मिलाकर इनकी संख्या 26 हो जाती है।

इन्हीं एकादशीयों में एक एकादशी आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी जिसे योगिनी एकादशी कहते हैं।योगीनी एकादशी व्रत से जुड़े कई नियम (Yogini Ekadashi 2022 )  धर्म ग्रंथों में बताए गए हैं। इन नियमों का पालन करने पर ही व्रत और पूजा का संपूर्ण फल प्राप्त होता है।  जानिए इस व्रत से जुड़े नियमों के बारे में…

1. झूठ न बोलें और न किसी की जुगली करें
एकादशी तिथि पर भूलकर भी कभी झूठ नहीं बोलना चाहिए और न ही किसी की चुगली करनी चाहिए। ऐसा करना महापाप माना गया है। झूठ बोलने से आपके पुण्य कर्म  कम होते हैं और चुगली करने से मान-सम्मान में कमी आती है। इसलिए एकादशी पर भूलकर भी ये काम नहीं करने चाहिए, नहीं तो व्रत का पुण्य फल नहीं मिल पाता है।

2. मांसाहार और शराब का सेवन न करें

कीसी भी एकादशी तिथि पर मांसाहार का सेवन करना बहुत बड़ा पाप माना गया है, और इसे हिंदू धर्म में क्षमा न करने योग्य अपराध माना गया है। एकादशी के दिन उपवास रखकर फलाहार करना चाहिए या सात्विक भोजन करना चाहिए, जिससे कि मन में किसी तरह का कोई बुरा भाव उत्पन्न न हो। साथ ही इस दिन किसी भी तरह का नशा करने से भी बचना चाहिए। 

3. ब्रह्मचर्य का पालन करें
एकादशी के एक दिन पहले यानी दशमी तिथि की रात से ही व्रत के नियमों का पालन करते हुए ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। इस नियम का पालन एकादशी तिथि की रात को भी करना चाहिए। इन दोनों ही रातों को जमीन पर सोना चाहिए यानी पलंग पर न सोते हुए जमीन पर चटाई बिछाकर सोना चाहिए।


4. मन में बुरे विचार न लाएं
एकादशी का व्रत सिर्फ शारीरिक रूप से ही नहीं बल्कि मानसिक रूप से भी करना चाहिए। यानी एकादशी के दिन मन में किसी के प्रति कोई बुरे विचार नहीं आने चाहिए। यानी न किसी के बारे में बुरे बोलना चाहिए और न ही सोचना चाहिए। ऐसे विचार जो मन को उत्तेजित करें, उनके बारे में सोचने से भी व्रत का पुण्य फल प्राप्त नहीं होता।             



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